*जीवित दंपति ने की मरणोपरांत देहदान की घोषणा, कहा— “मृत्यु के बाद भी शरीर का हो समाजहित में सदुपयोग”*
*केकड़ी 23 फरवरी (पवन राठी )*
*मानव सेवा और समाजहित की अनूठी मिसाल पेश करते हुए केकड़ी के गुजराती मोहल्ला निवासी बुजुर्ग दंपति ने मरणोपरांत देहदान करने की घोषणा की है। 76 वर्षीय शांति वल्लभ द्विवेदी और उनकी 72 वर्षीय धर्मपत्नी शशिकला द्विवेदी ने स्वेच्छा से देहदान का संकल्प लेकर समाज को प्रेरणादायक संदेश दिया।*
*बताया गया कि दंपति कई वर्षों से मन में देहदान का संकल्प संजोए हुए थे और सोमवार को उनकी यह इच्छा साकार हुई। उन्होंने भारत विकास परिषद के पदाधिकारियों की उपस्थिति में देहदान संबंधी संकल्प पत्र भरकर औपचारिक प्रक्रिया पूरी की।*
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*इस दौरान परिषद के सचिव रामनिवास जैन, प्रांतीय प्रभारी सर्वेश विजय तथा वरिष्ठ सदस्य महावीर प्रसाद पारीक ने दंपति का तिलक लगाकर एवं उपरणा पहनाकर सम्मान किया। कार्यक्रम में दंपति के भाई इंद्र वल्लभ द्विवेदी सहित अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।*
*शांति वल्लभ द्विवेदी ने अपने संकल्प के पीछे की भावना बताते हुए कहा कि उन्होंने मेडिकल विभाग में रेडियोग्राफर के पद पर केकड़ी चिकित्सालय में वर्षों तक सेवा दी है। **उनकी इच्छा रही कि मृत्यु के बाद भी उनकी देह चिकित्सा शिक्षा और मानव सेवा के कार्यों में उपयोगी बने।*
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*उन्होंने कहा, “देहदान सबसे बड़ा दान है। इससे मृत्यु के बाद भी व्यक्ति समाज के काम आ सकता है।”*
*दंपति के इस निर्णय को उपस्थित लोगों ने अत्यंत प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि इससे समाज में देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और अन्य लोग भी इस दिशा में आगे आने के लिए प्रेरित होंगे।*
*बुजुर्ग दंपति के इस सराहनीय कदम को क्षेत्र में मानव सेवा की उत्कृष्ट मिसाल माना जा रहा है।*

