चंद्र प्रकाश पुरोहित ब्यूरो प्रमुख जैसलमेर
“श्रद्धा और विश्वास ही राम हैं: प्रकाशानंद जी महाराज ने सुनाया जीवन को दिशा देने वाला संदेश”
“राम नाम की अमृत वर्षा में भीगा जन-जन, कथा के अंतिम दिन उमड़ा आस्था का सागर”
राम कथा के समापन पर उमड़ा श्रद्धा का सागर, श्रीराम के आदर्शों ने किया भावविभोर
नाचना। श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर स्थित माहेश्वरी सत्संग भवन में चल रही नौ दिवसीय राम कथा के अंतिम दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा पंडाल में गूंजते “जय श्रीराम” के गगनभेदी उद्घोषों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं की आंखों में भक्ति, हृदय में आस्था और मन में प्रभु श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प स्पष्ट दिखाई दे रहा था।
22 मई से 30 मई 2026 तक आयोजित इस पावन राम कथा का आयोजन माहेश्वरी समाज के तत्वावधान में सामूहिक सहयोग एवं श्रद्धाभाव से किया गया। समाज अध्यक्ष जगदीश चाण्डक ने बताया कि कथा का उद्देश्य समाज में धार्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों का प्रसार करना है, जिससे नई पीढ़ी भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा ले सके।
मध्यप्रदेश से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक श्री प्रकाशानंद जी महाराज ने अपने ओजस्वी एवं भावपूर्ण प्रवचनों में भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, मर्यादा, त्याग, करुणा और संस्कारों का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि “श्रद्धा और विश्वास ही राम हैं। राम केवल एक नाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की सर्वोत्तम पद्धति हैं।”
तुलसीदास रचित रामचरितमानस के प्रसंगों के माध्यम से महाराज ने राम के बाल्यकाल, माता-पिता के प्रति उनकी आज्ञाकारिता, गुरुजनों के प्रति सम्मान, भाईचारे की मिसाल और समाज के प्रति कर्तव्यनिष्ठा का ऐसा जीवंत चित्रण किया कि श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा के दौरान कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
महाराज ने कहा कि श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, संयम और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। सत्य, सेवा और सदाचार ही जीवन की वास्तविक पूंजी हैं।
कथा के बीच-बीच में प्रस्तुत भजनों, चौपाइयों और संगीतमय संकीर्तन ने भक्तिरस की ऐसी धारा प्रवाहित की कि पूरा परिसर राममय हो गया। श्रद्धालु भजनों पर झूमते हुए प्रभु भक्ति में लीन दिखाई दिए।
राघे राघे ने क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राम कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला आध्यात्मिक महायज्ञ है। उन्होंने सभी से भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर समाज में प्रेम, सद्भाव और संस्कारों की ज्योति जलाने का आह्वान किया।
राम कथा के समापन अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं का ऐसा संगम देखने को मिला जिसने हर श्रद्धालु के मन में प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट आस्था और मर्यादामय जीवन जीने की प्रेरणा का दीप प्रज्वलित कर दिया।
“श्रद्धा और विश्वास ही राम हैं: प्रकाशानंद जी महाराज ने सुनाया जीवन को दिशा देने वाला संदेश”
