चंद्र प्रकाश पुरोहित ब्यूरो जैसलमेर
नाचना जैसलमेर
भक्ति में डूबा जनसागर: 21वें पाटव उत्सव में लक्ष्मीनारायण प्रभु की भव्य शोभायात्रा, हर हृदय हुआ भाव-विभोर
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देव परिक्रमा के साथ उमड़ी अटूट आस्था, भजन-कीर्तन में झूम उठा पूरा क्षेत्र
खबर:
आज 21वें पाटव उत्सव के पावन अवसर पर लक्ष्मीनारायण मंदिर धाम एक दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा। जैसे ही प्रभु लक्ष्मीनारायण की शोभायात्रा प्रारंभ हुई, वातावरण “जय श्री लक्ष्मीनारायण” के गगनभेदी जयघोष से गुंजायमान हो गया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं देव लोक धरती पर उतर आया हो।
सुगंधित फूलों से सजी पालकी में विराजित प्रभु के दर्शन करते ही श्रद्धालुओं के हृदय श्रद्धा और प्रेम से भर उठे। अनेक भक्तों की आंखें स्वतः ही नम हो गईं—यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन का पवित्र क्षण था। जगह-जगह पुष्पवर्षा कर भक्तों ने प्रभु का स्वागत किया, मानो हर कोई अपने भाव अर्पित कर रहा हो।
ढोल-नगाड़ों की मधुर ध्वनि, भजन-कीर्तन की सुरलहरियों और भक्तों के नृत्य ने पूरे माहौल को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। महिलाएं मंगलगीत गा रही थीं, बच्चे हाथ जोड़कर प्रभु के साथ कदम से कदम मिला रहे थे, और युवा वर्ग सेवा व व्यवस्था में जुटा दिखाई दिया—यह दृश्य सच्चे अर्थों में ‘सांझी आस्था’ का प्रतीक बन गया।
शोभायात्रा के पश्चात श्रद्धालुओं ने श्रद्धा पूर्वक देव परिक्रमा की। हर कदम के साथ भक्त अपने भीतर की नकारात्मकताओं को छोड़, प्रभु के चरणों में समर्पित होते नजर आए। ऐसा लग रहा था मानो हर परिक्रमा के साथ जीवन को एक नई दिशा और शांति मिल रही हो।
नंद किशोर टावरी ने काह कि
21वां पाटव उत्सव केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही आस्था, संस्कार और श्रद्धा की जीवंत विरासत है। इस दिव्य आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि जब मन सच्ची भक्ति में लीन होता है, तब हर हृदय में स्वयं भगवान का वास हो जाता है।
जैसलमेर
