परमाणु शक्ति से विकास की नई पहचान बना पोखरण
51 वर्ष बाद भी देशभक्ति, विज्ञान और गौरव की मिसाल
चंद्र प्रकाश पुरोहित, ब्यूरो जैसलमेर
पोखरण केवल राजस्थान का एक कस्बा नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक ताकत, सेना के शौर्य और राष्ट्रीय आत्मविश्वास का प्रतीक बन चुका है। वर्ष 1974 और 1998 में हुए ऐतिहासिक परमाणु परीक्षणों ने इस रेगिस्तानी क्षेत्र को विश्व मानचित्र पर विशेष पहचान दिलाई। आज 51 वर्ष बाद भी पोखरण का नाम सुनते ही हर भारतीय गर्व से भर उठता है।
18 मई 1974 को भारत ने “स्माइलिंग बुद्धा” परमाणु परीक्षण कर दुनिया को अपनी वैज्ञानिक क्षमता का संदेश दिया था। इसके बाद 11 और 13 मई 1998 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में “ऑपरेशन शक्ति” के तहत सफल परमाणु परीक्षणों ने भारत को विश्व की परमाणु शक्तियों में शामिल कर दिया।
इन परीक्षणों में भारतीय वैज्ञानिकों, विशेषकर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की भूमिका ने पूरे देश को गौरवान्वित किया। पोखरण की रेत में छिपी इस ऐतिहासिक सफलता ने दुनिया को भारत की आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति का एहसास कराया।
रेगिस्तान में विज्ञान और सुरक्षा का संगम
थार मरुस्थल की तपती रेत में बसे पोखरण ने यह साबित किया कि कठिन परिस्थितियां भी भारत के हौसलों को रोक नहीं सकतीं। अत्यधिक गर्मी और रेतीले इलाके के बीच वैज्ञानिकों और सेना ने पूरी गोपनीयता के साथ मिशन को सफल बनाया। यही कारण है कि आज भी पोखरण को भारत की रणनीतिक शक्ति का सबसे मजबूत प्रतीक माना जाता है।
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस का गौरव
11 मई को पूरे देश में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों, आत्मनिर्भर तकनीक और नवाचार की याद दिलाता है। स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी संस्थानों में इस दिन पोखरण की सफलता को प्रेरणा के रूप में याद किया जाता है।
पर्यटन और गौरव का केंद्र बन रहा क्षेत्र
आज पोखरण केवल सैन्य दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यटन और इतिहास के लिहाज से भी आकर्षण का केंद्र बन रहा है। देशभर से लोग उस भूमि को देखने पहुंचते हैं, जहां भारत ने अपनी शक्ति का परचम दुनिया में लहराया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि आने वाले समय में यदि यहां पर्यटन और बुनियादी सुविधाओं का और विकास हो तो यह क्षेत्र देश का प्रमुख ऐतिहासिक-वैज्ञानिक पर्यटन केंद्र बन सकता है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
पोखरण की कहानी आज के युवाओं को यह संदेश देती है कि विज्ञान, देशभक्ति और दृढ़ संकल्प से भारत किसी भी चुनौती का सामना कर सकता है। यह स्थान केवल परमाणु परीक्षण स्थल नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, साहस और “नया भारत” की पहचान बन चुका है।
आज भी जब थार की रेत पर सूरज चमकता है, तो पोखरण की धरती भारत के वैज्ञानिक स्वाभिमान और राष्ट्रीय गौरव की गाथा सुनाती नजर आती है।
जैसलमेर
