जैसलमेर

चंद्र प्रकाश पुरोहित ब्यूरो जैसलमेर
*जिला कलक्टर ने पोकरण, खेतोलाई एवं लाठी के चिकित्सा संस्थानों का किया औचक निरीक्षण*

*व्यवस्थाओं का लिया जायजा, चिकित्सकों व कार्मिकों को दिए सख्त निर्देश*

*आमजन के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं – जिला कलक्टर*

जैसलमेर, 9 मई। जिला कलक्टर अनुपमा जोरवाल ने शनिवार को जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित चिकित्सा संस्थानों का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने राजकीय आयुर्वेद औषधालय पोकरण, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खेतोलाई एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र लाठी पहुंचकर व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण किया तथा संबंधित अधिकारियों एवं चिकित्सा कार्मिकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान जिला कलक्टर ने ओपीडी व्यवस्था, दवा वितरण, साफ-सफाई, चिकित्सकीय उपकरणों की उपलब्धता, मरीजों को दी जा रही सुविधाओं, रिकॉर्ड संधारण एवं स्टाफ की उपस्थिति का विस्तार से निरीक्षण किया। उन्होंने उपचार के लिए आए मरीजों एवं उनके परिजनों से संवाद कर चिकित्सा सेवाओं के संबंध में फीडबैक भी लिया।

जिला कलक्टर ने कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि प्रत्येक व्यक्ति को समय पर गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों तथा कोई भी व्यक्ति उपचार से वंचित नहीं रहे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा संस्थान आमजन के लिए जीवन रेखा के समान हैं, इसलिए यहां कार्यरत प्रत्येक अधिकारी एवं कार्मिक अपनी जिम्मेदारी पूरी संवेदनशीलता एवं जवाबदेही के साथ निभाएं।

निरीक्षण के दौरान कुछ व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पाए जाने पर जिला कलक्टर ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधारात्मक कार्यवाही के निर्देश दिए। उन्होंने चिकित्सा संस्थानों में साफ-सफाई, नियमित उपस्थिति, दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता एवं मरीजों के साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि चिकित्सा सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनुपस्थिति अथवा आमजन की शिकायतें मिलने पर संबंधित अधिकारी एवं कार्मिक के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में शिथिलता किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी तथा निरीक्षण लगातार जारी रहेंगे।

जिला कलक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आमजन को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संस्थानों में आवश्यक संसाधनों का समुचित उपयोग सुनिश्चित किया जाए एवं मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो। उन्होंने कहा कि चिकित्सा संस्थानों में अनुशासन, पारदर्शिता एवं सेवा भाव सर्वोपरि होना चाहिए।

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