पेंशनर समाज का आरजीएचएस को इंश्योरेंस मॉडल में बदलने का विरोध

पेंशनर समाज का आरजीएचएस को इंश्योरेंस मॉडल में बदलने का विरोध
फर्जीवाड़े पर कार्रवाई की मांग, कैशलेस इलाज की व्यवस्था बनाए रखने की अपील
शम्भू दयाल व्यास,ब्यावर
ब्यावर, 29 अप्रैल। राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना (आर.जी.एच.एस.) को इंश्योरेंस मॉडल पर ले जाने की प्रस्तावित योजना का पेंशनर समाज, ब्यावर ने कड़ा विरोध जताया है। पेंशनर समाज का कहना है कि योजना में बदलाव करने के बजाय फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

पेंशनर समाज के अध्यक्ष नारायण सिंह पंवार ने बताया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के हालिया बयान में आरजीएचएस को मां योजना की तर्ज पर इंश्योरेंस मॉडल में बदलने की बात कही गई है। इस पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा कि अप्रैल माह की बैठक में पेंशनर समाज ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव का विरोध किया था।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इंश्योरेंस मॉडल लागू होने का अर्थ पेंशनरों से पुनः प्रीमियम राशि वसूलना होगा, जो पूरी तरह अनुचित है। पंवार ने कहा कि वर्तमान पेंशनर अपने सेवा काल के दौरान हर माह राजस्थान पेंशनर मेडिकल फंड (R.P.M.F.) में योगदान देते रहे हैं, इसलिए अब उनसे दोबारा राशि लेना न्यायसंगत नहीं है।

पेंशनर समाज ने यह भी कहा कि उन्हें केवल कैशलेस चिकित्सा सुविधा चाहिए और किसी भी प्रकार की पुनर्भरण (रिइम्बर्समेंट) या इंश्योरेंस आधारित योजना स्वीकार नहीं की जाएगी।

फर्जीवाड़े के मुद्दे पर पेंशनर समाज ने आरोप लगाया कि इसमें मुख्य रूप से निजी अस्पतालों और दुकानदारों की भूमिका रही है। समाज ने सुझाव दिया कि सभी निजी अस्पतालों में सहकारी उपभोक्ता भंडार की दुकानों का संचालन अनिवार्य किया जाए और आरजीएचएस के तहत दवाइयां केवल इन्हीं दुकानों से उपलब्ध कराई जाएं।

पंवार ने कहा कि यदि यह व्यवस्था लागू की जाती है तो योजना फिर से सुचारू रूप से चलने लगेगी, जैसा कि प्रारंभिक समय में चल रही थी।

पेंशनर समाज ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि योजना में बदलाव करने से पहले सभी हितधारकों को विश्वास में लिया जाए और पेंशनरों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

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