चंद्र प्रकाश पुरोहित ब्यूरो
“45° की तपिश में सरहद के प्रहरी झुलस रहे… भामाशाहों ने बढ़ाया हाथ, BOP पोस्टों तक पहुंचेंगे 81 कूलर”
रेगिस्तान की 45 डिग्री से पार जाती भीषण गर्मी में जहां आम लोग घरों में दुबक जाते हैं, वहीं भारत-पाक सीमा पर तैनात जवान खुले आसमान के नीचे दिन-रात देश की सुरक्षा में डटे रहते हैं। झुलसाती हवाएं, तपती रेत और लगातार चौकसी—इन सबके बीच भी उनका हौसला अडिग रहता है।
ऐसे कठिन हालात में अब समाज ने भी अपना कर्तव्य निभाने का संकल्प लिया है। सीमाजन कल्याण समिति के माध्यम से भामाशाहों ने 81 कूलर उपलब्ध करवाए हैं, जो विक्रम पोस्ट से वितरण के बाद सीमा पर बनी बीओपी (Border Out Post) चौकियों तक पहुंचाए जाएंगे। ये वही चौकियां हैं, जहां जवान सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में तैनात रहते हैं।
बताया गया कि इन कूलरों की व्यवस्था जोधपुर निवासी भामाशाह ओम प्रकाश खत्री द्वारा की गई है। उनका कहना है कि “देश की रक्षा में लगे जवानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, यह केवल सरकार नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी है।”
कार्यक्रम में बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी, सीमाजन कल्याण समिति के पदाधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, बॉर्डर की बीओपी पोस्टें देश की पहली सुरक्षा पंक्ति होती हैं, जहां जवान भीषण गर्मी, तेज आंधी और विपरीत परिस्थितियों के बीच लगातार निगरानी करते हैं। ऐसे में यह पहल न केवल राहत पहुंचाने वाली है, बल्कि जवानों के प्रति समाज के सम्मान और संवेदनशीलता का प्रतीक भी है।तहसील मंत्री राजेन्द्र पालीवाल: “जो जवान देश के लिए तप रहे हैं, उन्हें राहत देना हमारा फर्ज है—यह सेवा नहीं, सम्मान है।” सम्पर्क प्रमुख
दुर्गादास टावरी: “सरहद पर खड़े जवान सिर्फ सैनिक नहीं, हमारे विश्वास की दीवार हैं… उन्हें राहत देना हमारा सौभाग्य है।” I G एम एल गर्ग ने समारोह में सीमा की सुरक्षा केवल जवानों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सहभागिता से ही यह और मजबूत बनती है। उन्होंने सीमा जनकल्याण समिति के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के प्रयास जवानों के लिए बड़ा संबल बनते हैं।
