चालान काटने पर हुआ विवाद, कांग्रेस में सीनियर नेता के इस्तीफे की धमकी
ब्यावर में पीसीसी चीफ साहब को सीनियर नेता ने ‘कल-परसों का लड़का’ करार देकर इस्तीफे की धमकी दे दी। कोटा में ट्रैफिक पुलिसकर्मी और व्यापारी का झगड़ा शांत कराने इंचार्ज साहब ने हाथ जोड़कर कपड़ा फाड़ ऑफर दे दिया। जालोर में रेस का घोड़ा ट्रैक से उतरकर भीड़ में घुस गया और बेमौसम बारिश तसल्ली से जीमने भी नहीं दे रही। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में..

ट्रैफिक इंचार्ज बोले- मेरे कपड़े फाड़ लो:चालान काटने पर हुआ विवाद, कांग्रेस में सीनियर नेता के इस्तीफे की धमकी
1. सीनियर नेता का तंज, चीफ का पलटवार
कांग्रेस अभियान पर है। अभियान में आह्वान है-संगठन बचाओ। संगठन बच जाए तो फिर ऐलान है कि लोकतंत्र बचाओ।
हालांकि, ब्यावर में अभियान का आह्वान ही संकट में दिखा। सीनियर नेताजी ने पीसीसी चीफ साहब को ‘कल-परसों का लड़का’ कह दिया।
हुआ यूं कि पूर्व जिलाध्यक्ष रामचंद्र चौधरीजी का भाषण होना था। उनका नाम काटकर नंबर कुछ नेताओं के भाषण के बाद रख दिया गया।
बस इतनी सी बात पर संगठन खतरे में आ गया। रामचंद्र जी बिदक गए। मंच से धमकी भरे अंदाज में बोले-यह पसंद नहीं। मेरा इस्तीफा ले लो, आज ही दे दूंगा। जलालत सहन नहीं होती। दो बार जिलाध्यक्ष रहा हूं। कल-परसों के….
उनकी भड़ास निकल गई, लेकिन अब डोटासरा जी हर्ट हो गए। करारा जवाबी हमला किया। बोले-रामचंद्रजी कांग्रेस तो आपका सियासी कुंआरापन खत्म करना चाहती थी, थोड़ा सा बच गए आप।
आपको घर बैठे कांग्रेस ने लोकसभा का टिकट दिया। इससे बड़ा सम्मान क्या होगा। बड़े मंच पर ‘मैं क्यों नहीं बोला- वो क्यों बोला’ करोगे तो यहां बेटी का ब्याह नहीं हो रहा है, जिसमें न्योता दिया जाए।
कांग्रेस के नेताओं ने देश के लिए प्राण दिए हैं। ‘पहले बोलूं-वो नहीं बोले’ करोगे तो इतिहास माफ नहीं करेगा।
2. ट्रैफिक इंचार्ज ने हाथ जोड़कर किया ‘डैमेज कंट्रोल’
कड़ाके की धूप में, हवा में, धूल में, बारिश में चौराहे पर खड़ा ट्रैफिक पुलिसकर्मी किसके लिए खड़ा है? आपके हमारे लिए खड़ा है।
वह सड़क पर व्यवस्था संभाल रहा है इसलिए आप सुरक्षित हैं। वह रोककर आपसे हेलमेट पहनने को कहता है, किसके लिए? आपका सिर बचा रहे, इसके लिए।
यह उस पूरे फसाद के मंथन के बाद सार निकलकर आया जो कोटा ट्रैफिक पुलिस के इंचार्ज साहब ने यातायात पुलिस के बचाव में कहा।
पुलिस के मुताबिक- व्यापारी कार में था। सीट बेल्ट नहीं लगा था। कान पर फोन था। ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने धर लिया। 2 हजार का चालान ठोकने लगा। व्यापारी गर्मा-गर्मी करने लगा।
इसी नोक-झोंक में व्यापारी को चोट लग गई। वह ‘सिंपैथी एडवांटेज’ लेने पर अड़ गया। भीड़ जुट गई। पुलिस के खिलाफ माहौल बन गया।
ऐसे में ट्रैफिक इंचार्ज साहब मौके पर पहुंचे और हाथ जोड़कर व्यापारी का कपड़ा फाड़ ऑफर दे डाला। बोले- भैया तुम्हारे जी को तसल्ली न हुई हो तो मेरे कपड़े फाड़ लो।
जो अगर मेरे मुंह से चूं तक निकल गई तो मैं अपने पिता की संतान नहीं। ‘सिंपैथी एडवांटेज’ की बॉल उछलकर कभी पुलिस तो कभी व्यापारी के पाले में जाती रही। किसी तरह मामला शांत हुआ।
3. टारगेट से भटक गया घोड़ा
जालोर के सेवाड़िया में आपेश्वर महादेव की धरती पर पशु मेले का माहौल। मेले का बड़ा आकर्षण घुड़दौड़।
घोड़ों की रेस देखने के लिए दूर-दूर से लोग आए थे। ट्रैक के दोनों तरफ भीड़। जहां घोड़ों को रुकना था वहां गेस्ट बैठे।
प्लेन लैंड करता है तो रुकने के लिए रनवे चाहिए। जितनी ज्यादा स्पीड उतना लंबा रनवे जरूरी।
घोड़े पूरी ताकत से फाइनल लाइन की ओर दौड़ रहे थे। भीड़ भी घुड़दौड़ के फाइनल क्षणों में ट्रैक के अंदर तक खिसक आई थी।
इस दौरान एक घोड़ा टारगेट से भटकी हुई मिसाइल की तरह भीड़ में घुस गया। चार लोग चपेट में आ गए।
4. चलते-चलते…
लगता है देवता रुठे हुए हैं। पवन-पुत्र की जयंती पर पवन देव ने शोभायात्रा में खलबली बचा दी।
फसल कटने के दिनों में इंद्रदेव जी भरकर पानी बरसा रहे हैं। कहीं-कहीं तो ओलों की सफेद चादर बिछा दी है।
धरती के देवता डॉक्टरों को कहा जाता है, लेकिन उनसे भी बढ़कर देवता तो किसान हैं। जो पूरी मानव जाति को जिंदा रखने के लिए खून पसीना बहाकर अन्न उपजाते हैं।
पानी-ओलों ने फसलें चौपट कर दीं, खलिहान में पड़ा गेहूं क्यारियों पर तैर रहा है। सालभर की मेहनत थी।
किसान सालभर कुदरत से जूझता है। कभी कुदरत मेहरबान तो कभी कहरवान। हर तरह के हालात से बाहर निकलकर किसान फिर हिम्मत जुटाता है और फसल बोता है।
दौसा के ग्रामीण इलाके से एक शादी समारोह का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर है।
भोज के लिए पंडाल सजा है। टेबलें लगी हैं। टेबलों पर पत्तल-दोने हैं। लोग खड़े हैं और लोगों के सिर पर प्लास्टिक की कुर्सियां।
जोरदार बारिश हो रही है। सब कुछ भीगा हुआ है। जीमण चौपट हो चुका है, लेकिन पूरे पंडाल में हंसी गूंज रहे हैं। ऐसे हालत में हंसने का माद्दा भी किसानों के बच्चे ही रखते हैं।
