चंद्र प्रकाश पुरोहित// ओलों की मार, मेहनत बेकार — खेतों में बिछी फसल, किसानों के अरमान चकनाचूर

नाचना जैसलमेर
ओलों की मार, मेहनत बेकार — खेतों में बिछी फसल, किसानों के अरमान चकनाचूर
अतिवृष्टि और ओलावृष्टि ने छीनी मुस्कान, ईसबगोल-जीरा-चना फसलें बर्बादी ।
कबीरपुरा में तबाही की बारिश — खेत उजड़े, किसान बेहाल

सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के असर से हुई अतिवृष्टि और ओलावृष्टि ने किसानों की उम्मीदों पर करारा प्रहार किया है। क्षेत्र में तेज आंधी और बारिश के साथ गिरे ओलों ने खेतों में तैयार खड़ी फसलों को जमीन पर बिछा दिया।
तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि खेतों में कटाई के लिए तैयार ईसबगोल, जीरा और चने की फसलें ओलों की मार से गिरकर खराब हो गई हैं। कई जगह फसलें पानी और कीचड़ में दब गईं, जिससे उनकी गुणवत्ता भी प्रभावित हो गई है।
किसानों का कहना है कि पूरी सीजन की मेहनत एक ही झटके में बर्बाद हो गई। “फसल तैयार थी, बस कटाई बाकी थी, लेकिन अचानक मौसम बदलने से सब कुछ खत्म हो गया,” एक किसान ने दर्द बयां करते हुए कहा।
मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी (40-50 किमी/घंटा), बारिश और ओलावृष्टि का दौर देखने को मिला, जिसका सबसे ज्यादा असर खेतों पर पड़ा है।
किसानों की मांग:
पीड़ित किसानों ने प्रशासन से तुरंत गिरदावरी करवाकर उचित मुआवजा देने की मांग की है, ताकि उन्हें इस भारी नुकसान से कुछ राहत मिल सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय हुई बारिश और ओलावृष्टि से उत्पादन के साथ-साथ फसल की गुणवत्ता पर भी गहरा असर पड़ेगा, जिससे बाजार में कीमतें और किसानों की आय दोनों प्रभावित होंगी।
कुल मिलाकर, मौसम की इस मार ने एक बार फिर किसान को असहाय बना दिया है, जहां एक तरफ कर्ज और लागत का बोझ है, वहीं दूसरी ओर प्रकृति का यह प्रहार उनके सपनों को तोड़ रहा है।तीखी हेडलाइन:
कबीरपुरा में तबाही की बारिश — खेत उजड़े, किसान बेहाल
ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से ईसबगोल, जीरा-चना फसल चौपट, प्रशासन से मदद की गुहार
कबीरपुरा/नाचना (जैसलमेर):
सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के असर से क्षेत्र में हुई अतिवृष्टि और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। कबीरपुरा व आसपास के इलाकों में तेज आंधी, बारिश और ओलों की मार से खेतों में खड़ी व कटाई के लिए तैयार फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं।
खेतों में जगह-जगह गिरी और बिखरी फसलें साफ तौर पर नुकसान की गंभीरता को बयां कर रही हैं। ईसबगोल, जीरा और चने की फसलें जमीन पर बिछ गईं, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर गहरा असर पड़ा है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि “पूरे साल की मेहनत एक ही दिन में खत्म हो गई। फसल तैयार थी, लेकिन ओलावृष्टि ने सब चौपट कर दिया।”
पत्रकारों से अपील:
कबीरपुरा के किसानों ने पत्रकार बंधुओं से निवेदन किया है कि इस गंभीर स्थिति को प्रशासन तक प्रमुखता से पहुंचाया जाए, ताकि जल्द से जल्द नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाया जा सके।
प्रशासन से मांग:
पीड़ित किसानों ने गिरदावरी करवाने, राहत पैकेज घोषित करने और फसल बीमा का लाभ शीघ्र दिलाने की मांग की है।
स्थिति चिंताजनक:
किसानों ने बताया किइस समय हुई ओलावृष्टि से न केवल उत्पादन घटेगा बल्कि फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी, जिससे किसानों को दोहरा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
कुल मिलाकर, कबीरपुरा क्षेत्र में प्रकृति की इस मार ने किसानों को संकट में डाल दिया है और अब सभी की निगाहें प्रशासन की राहत पर टिकी हैं।

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