हाओ’ज़ दैट! क्रिकेट क्लबों में परिवारवाद नॉट आउट:जयपुर की पिच पर बरसों से टिके 5 परिवार, डीसीए के वोटिंग राइट्स और निर्णयों पर असर

  • गली; 5 परिवारों के पास 40 फीसदी से ज्यादा क्लब, इन्हीं का ही चुनावों में दखल
  • गली; 1 परिवार के 17 क्लब- बेटा, भाई, भांजा, साला, बहनोई और पड़ोसी सदस्य

जयपुर की घरेलू पिच पर चंद परिवारों की सियासत बरसों से नॉट आउट है। ऊपर नेता पुत्र काबिज हैं और जिलों के हालात ऐसे हैं कि 134 क्लबों में से 55 क्लब महज 5 परिवारों के कब्जे में हैं। खिलाड़ी हमेशा से हिट विकेट होते रहे हैं …क्योंकि उनके पास वोटिंग राइट्स तक नहीं हैं।

आंकड़ों को देखें तो एक-एक परिवार के 20-20 क्लब हैं, जिनके सचिव को वोटिंग राइट्स हैं। ये सीधे जयपुर जिला क्रिकेट संघ के चुनावों को प्रभावित करते हैं। इनमें आरसीए के पूर्व पदाधिकारी और रणजी खिलाड़ी शामिल हैं। कुल 134 में से 18 संस्थागत क्लबों को हटाने के बाद शेष क्लबों में 5 परिवारों का ही प्रभाव है। 40% से अधिक क्लबों पर इन्हीं परिवारों का दबदबा होने से जयपुर की क्रिकेट पर इनका नियंत्रण बना हुआ है। हैरत की बात है कि ज्यादातर क्लब ऐसे हैं जिनके पास कोई ग्राउंड नहीं हैं। जिनके पास ग्राउंड है, वो सदस्य ही नहीं हैं। सभी जिलों में भी यही हाल; प्रदेश के लगभग सभी जिलों में एक-एक परिवार के पास कई क्लब हैं। वोटिंग राइट परिवार के पास होने से जिलों में सत्ता दशकों से नहीं बदली।

  • 20 क्लब; इनके चार भाई, दो बेटे, बेटे का साला, दो भांजे, बहनोई, साला, बहनोई, बेटे का ससुर सहित कई रिश्तेदार और पड़ोसी क्लबों से जुड़े हैं। इनके पास 17 क्लबों के अलावा अन्य 3 क्लबों का भी समर्थन है।

डॉ. बिमल सोनी, पूर्व डिप्टी प्रेसिडेंट

  • 20 क्लब; खुद एक क्लब में अध्यक्ष और एक में सचिव हैं। दोनों बेटे, अस्पताल के तीन डॉक्टर्स, एकाउंटेंट, पीए और लिफ्टमैन भी क्लबों से जुड़े हैं। 13 क्लबों पर डायरेक्ट और कम से कम 7 क्लबों पर इनडायरेक्ट प्रभाव है।

सलीम खान, जेडीसीए से जुड़े रहे

  • 5 क्लब; खुद के अलावा बेटा, साला और दो अन्य रिश्तेदार क्लबों से जुड़े हैं। इनके पास पांच क्लब हैं और ये डॉ. बिमल सोनी के समर्थन में रहते हैं। इनके क्लबों के ज्यादातर मैच भी सोनी क्रिकेट ग्राउंड पर ही होते हैं।

ओम शर्मा, क्रिकेट का जिम्मा

  • 4 क्लब; तीन क्लबों में खुद जुड़े हैं। एक में सचिव और दो में कोषाध्यक्ष हैं। उनके भतीजे और भाई भी क्लबों से जुड़े हैं। भाई सुरेश शर्मा एक क्लब में सचिव हैं। जेडीसीए एड हॉक कमेटी के कन्वीनर भी रह चुके हैं।

विनोद माथुर, पूर्व रणजी कप्तान

  • 6 क्लब; खुद तीन क्लबों में अध्यक्ष और एक में सचिव हैं। उनकी पत्नी और बेटा भी क्लबों से जुड़े हैं। मोहम्मद इकबाल इनके क्लब से भी जुड़े हैं।
  • 6-7 लोग और हैं जिनके पास 2-2 से ज्यादा क्लब हैं।

भास्कर एक्सपर्ट

किशोर रूंगटा, पूर्व कोषाध्यक्ष, बीसीसीआई

रणजी खिलाड़ियों को वोटिंग राइट्स दो स्पोर्ट्स एक्ट ने खेलों में परिवारवाद बढ़ाया है। इसलिए फैसलों पर परिवारों का दबदबा रहता है। इसे खत्म करने के लिए इंडिविजुअल मेंबर्स और पूर्व रणजी खिलाड़ियों को वोटिंग राइट्स देने होंगे।

वोटिंग का सियासी स्कोर बोर्ड समझिए

चुनाव क्लब का अध्यक्ष, सचिव या कोषाध्यक्ष कोई भी लड़ सकता है। वोटिंग राइट सिर्फ सचिव को, वहीं परिवार हावी। इसीलिए प्रमुख पदों चुनिंदा परिवार के लोग ही। पिछले 7 साल से चुनाव ही नहीं हुए। एडहॉक काम कर रही।

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