कोटा के सरकारी हॉस्पिटल में 4 प्रसूताओं की मौत और 8 की तबीयत बिगड़ने का मामला चिकित्सा विभाग के लिए पहेली बना हुआ है। हेल्थ मिनिस्टर गजेंद्र सिंह खींवसर भी कारणों का स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। मंत्री ने इसे पहेली माना और कहा कि उनके मंत्री रहते पहले ऐसे केस सामने नहीं आए और न ही सामान्य तौर पर ऐसे केस आते हैं।
उन्होंने कहा इस मामले में ड्रग की टेस्टिंग बहुत इंपॉर्टेंट है। प्रारम्भिक जांच में सामने आया कि एकदम से इतना रिएक्शन, संभवतया ब्लड स्ट्रीम में कुछ गया है। असली कारणों का पता ड्रग मेडिसिन की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही लग सकेगा। उन्होंने कहा फिलहाल हमारे पास भी इस मामले का कोई जवाब नहीं।दरअसल, घटना के 9 दिन बाद हेल्थ मिनिस्टर गजेंद्र सिंह खींवसर गुरुवार दोपहर 1.40 बजे कोटा मेडिकल कॉलेज आए। मंत्री खींवसर ढाई घंटे (170मिनट) के करीब कोटा में रुके। इस दौरान वो न्यू मेडिकल हॉस्पिटल, सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक (SSB) जेके लोन हॉस्पिटल गए। लास्ट में कलेक्ट्रेट परिसर में अधिकारियों के साथ बैठक ली। फिर मीडिया से बातचीत के बाद करीब 4:30 बजे कोटा से रवाना हो गए।मीडिया से बातचीत में ज्यादा समय तक मंत्री ने हॉस्पिटल की खूबियां और रिकॉर्ड के बारें में बताया। प्राइवेट हॉस्पिटल से सरकारी हॉस्पिटल से तुलना की। उन्होंने कहा जब कोई भी केस प्राइवेट हॉस्पिटल में कॉम्प्लिकेट हो जाता है, तो वो उम्मीद लेकर सरकारी हॉस्पिटल में दौड़ते हुए आते हैं।
मंत्री ने कहा-प्राइवेट हॉस्पिटल का तो सबको पता है। उनके लिए प्रॉफिट बहुत इंपोर्टेंट होता है। कई तो ऐसे हॉस्पिटल हैं, जो नॉर्मल डिलीवरी को भी सिजेरियन कर देते हैं। जबकि सरकारी हॉस्पिटल में ऐसा नहीं होता। जरूरत होने पर ही सिजेरियन करते हैं।
सरकारी हॉस्पिटल में ज्यादा सिजेरियन हो रहे हैं। इसका मतलब यह है कि कोटा की जनता को सरकारी हॉस्पिटल पर विश्वास है। मंत्री ने सरकारी हॉस्पिटल की ओपीडी व सिजेरियन के आंकड़े गिनाए।ऊर्जा मंत्री द्वारा हॉस्पिटल की व्यवस्थाओं को लेकर लिखे गए पत्र को लेकर पत्रकारों ने सवाल पूछा तो मंत्री खींवसर ने कहा कि हाल ही में ऊर्जा मंत्री द्वारा लिखा गया पत्र मिला है। मंत्री खींवसर ने उल्टा मीडिया से सवाल पूछते हुए कहा कि क्या आप खराब सरकारी हॉस्पिटल में अपने पेशेंट को इलाज के लिए लेकर जाएंगे? यहां ओपीडी इतनी ऊंची है। आप बताओ लोग पागल हैं क्या? इतने लोग क्यों आ रहे हैं। कोटा में दुखद घटना हुई है। यह नहीं होनी चाहिए थी। अभी मामले की जांच चल रही है। जांच के बाद ही कारण सामने आए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में 23 हजार हॉस्पिटल का स्ट्रक्चर है। सीएम 35-36 हजार करोड़ का बजट इस विभाग को देते हैं। जब कोटा में हादसा हुआ तो सरकार ने तुरंत एक्शन लिया। ड्रग कंट्रोलर को भेजा। जयपुर से विशेषज्ञ डॉक्टर की टीम भेजी, प्रिंसिपल सेक्रेटरी भी कोटा आए। एक गंभीर प्रसूता के लिए गुड़गांव से एयर एंबुलेंस भी तय की, लेकिन परिजनों ने मना कर दिया।
कोटा में सिजेरियन डिलीवरी के बाद 5 मई को प्रसूताओं की मौत व तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया था। जांच के लिए कमेटी गठित की। जयपुर से विशेषज्ञ डॉक्टर की टीम भी कोटा पहुंची।
8 मई को ऑपरेटिंग सर्जन असिस्टेंट प्रोफेसर गायनेकोलॉजी डॉ. श्रद्धा (UTB) की सेवाएं बर्खास्त कर दी गई। इमरजेंसी ओटी के ऑफिसर इंचार्ज एसोसिएट प्रोफेसर सर्जरी डॉक्टर नवनीत शर्मा, ऑपरेशन थिएटर की सिस्टर इंचार्ज गुरजीत कौर और लेबर रूम की सिस्टर इंचार्ज निमेश वर्मा को सस्पेंड कर दिया गया।
11 मई को स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ कोटा पहुंची। जयपुर से तीन सदस्य एक और टीम ने मामले में पड़ताल की। लंबी बैठकों का दौर चला।
12 मई को प्रसूताओं के इलाज में लापरवाही पर सरकार ने स्त्री और प्रसूति रोग विभाग, न्यू मेडिकल हॉस्पिटल कोटा के आचार्य डॉ. बद्रीलाल (बीएल पाटीदार), सह आचार्य डॉ. खुशबू मीणा, जेके लोन हॉस्पिटल की नर्सिंग अधिकारी पिंकी खींची और न्यू मेडिकल हॉस्पिटल की नर्सिंग अधिकारी मीनाक्षी मीणा को निलंबित कर दिया।
ड्रग डिपार्टमेंट ने दोनों हॉस्पिटल से 33 ड्रग मेडिसन के सैंपल लिए। इनमें से 9 सर्जिकल के सैंपल जांच के लिए कोलकाता लैब भेजे गए। जांच रिपोर्ट आने तक इन दवाओं के उपयोग पर प्रदेश भर में रोक लगा रखी है।
