TONK // धर्मसभा में आचार्य वर्धमान सागर ने भक्ति और आध्यात्मिक अनुभवों पर दिया प्रेरक संदेश

टोंक नगर में धर्मसभा का आयोजन किया गया, जिसमें आचार्य वर्धमान सागर ने सोलह कारण भावना पर्व के अंतर्गत भक्ति और आध्यात्मिक अनुभवों पर विस्तृत प्रवचन दिया। आचार्य ने बताया कि प्रभु की भक्ति से न केवल आवागमन का रोग दूर होता है, बल्कि असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।
धर्मसभा में उन्होंने दर्शन, विशुद्धि, विनय, शील, ज्ञानोपयोग, संवेग, शक्ति, तप आदि भावनाओं की विवेचना की। उन्होंने अपने 57 वर्षों के संयम काल के अनुभव साझा करते हुए बताया कि टोंक नगर के अतिशयकारी आदिनाथ भगवान के प्रभाव से उनका चातुर्मास समय से पहले ही पूरा हो गया।

राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य ने यह भी उल्लेख किया कि ऐसा ही अनुभव महावीर के अतिशय क्षेत्र में हुआ था, जब वे चातुर्मास स्थापना के अंतिम दिन ही वहां पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनकी दीक्षा 1969 में आचार्य धर्म सागर द्वारा महावीर में हुई थी और उस समय मस्तक पर सीधा स्वस्तिक बनाया गया।
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24 वर्षों बाद उनके सानिध्य में महामस्तकाभिषेक, दो पंच कल्याणक, 24 फिट की खड्गासन प्रतिमा और नूतन 24 चौबीसी तीन माह में तैयार होना साक्षात अतिशय है। समाज के प्रवक्ता पवन कंटान और विकास जागीरदार ने बताया कि आचार्य के प्रवचन से पूर्व आर्यिका देशनामति माताजी ने सुख और शांति प्राप्त करने के तरीकों की विवेचना की।
आचार्य ने यह संदेश दिया कि प्रभु की भक्ति से जीवन की कष्ट, पीड़ा और रोग दूर होकर सुख और मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।
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टोंक से रिपोर्टर अशोक शर्मा की रिपोर्ट।
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