TONK // स्वस्थ शरीर, संयमित दिनचर्या और स्वाध्याय ही असली धन हैं

टोंक में धर्मसभा में आरोग्य निरोगी रहने के उपाय, रोग़ किन कर्म से होते हैं? , स्वाध्याय का क्या महत्व होता है,? स्वाधीनता कैसी होनी चाहिए,? पर्यावरण का, अनुशासन का जीवन में क्या महत्व है? इसकी विस्तृत विवेचना में पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधिआचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने उपदेश में कर बताया कि ऐश्वर्य, धन सभी प्राप्त करना चाहते हैं इसके बिना आपको लौकिक जीवन बेकार लगता है, जिस प्रकार धन का उपयोग लौकिक कार्यों में आप करते हैं, धन का धार्मिक कार्यों में सदुपयोग करना चाहिए।

आपने आरोग्यता अर्थात स्वस्थ निरोगी शरीर को भी धन निरूपित किया।राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे प्रवचन में बताया कि दूषित खानपान दिनचर्या के कारण आपका शरीर रोगी होता है इसलिए दिनचर्या ठीक रहना चाहिए कषायऔर इंद्रिय विषय भोग के कारण शरीर, आत्मा मन खराब होकर रोगी है इससे आरोग्यता नष्ट होती है।इन कषाय और इंद्रीय विषय भोगों से आत्मा की रक्षा करना चाहिए ।आचार्य श्री ने विद्वत्ता ज्ञान को वास्तविक धन निरूपित किया इसके बिना व्यक्ति निर्धन है, सभी को सज्जनों के साथ मित्रता करना चाहिए मित्रता को भी एक धन बताया मित्रता के बिना आरोग्यता और विद्वता ज्ञान भी नष्ट हो जाता है।
आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व आर्यिका श्री विन्रममति माताजी ने बताया कि जैसे सूर्य अंधकार को नष्ट करता हैं उसी प्रकार जिनेन्द्र भगवान की भक्ति से कर्म नष्ट होते है धार्मिक कार्यों से पुण्य मिलता हैं आपने सभी परमेष्ठियों के सुख की विवेचना की।आज संघ सानिध्य में वृक्षारोपण कार्य की शुरुवात हुई।।समाज प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार अनुसार श्री आदिनाथ भगवान एवं प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी सहित पूर्वाचार्यों के चित्र का अनावरण कर दीप प्रवज्जलन करने का सौभाग्य श्री दिगंबर जैन महासमिति टोंक की महिला मंडल एवं,बाहर से आए अतिथियों ओर कमेटी को प्राप्त हुआ। आप सभी ने आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की
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टोंक से अशोक शर्मा की रिपोर्ट
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