TONK // रागी से बैरागी बनने का सूत्र है संत समागम – आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

हमारी और परमात्मा की आत्मा एक जैसी है उनके जैसे हमें भी परमात्मा बनने की योग्यता है आत्मा से कर्मों को हटाने पर ही चारों गतियां में जन्म मरण नहीं होगा आप लोग दुख को सुख मानते हो। आत्मा की शक्ति ज्ञान और पुरुषार्थ से करने पर प्राप्त होती हैं। महापुरुषों महान आत्माओं को संसार के दुख देखकर वैराग्य होता है भगवान के दर्शन करते समय उनके चेहरे को देखकर चर्चा करना चाहिए चिंतन करना चाहिए रागी को बैरागी बनने का सूत्र संत समागम से मिलता है।

मिथ्यादृष्टि राग में सुख मानता है। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज ने जैन धर्म संस्कृति ,जिनालय संरक्षण जिनवाणी संरक्षण पर महत्वपूर्ण अविश्वमरनीय योगदान दिया है। शांति सागर जी तीर्थ उदाहरण रहे हैं उन्होंने धार्मिक क्षेत्र में मिथ्यात्व का त्याग कराया। जैनवाडी ग्राम के जिन मंदिरों में ताले लगे थे उन्हें समाज की धारा में वापस जैन समाज को जोड़ा।

सामाजिक कुरीति बाल विवाह रोकने के लिए शारदा एक्ट बनाने की प्रेरणा दी। यह मंगल देशना 16 कारण पर्व में आचार्य भक्ति अंतर्गत आचार्य वर्धमानसागर जी ने धर्मसभा में प्रकट की। राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि हितेंद्र सागर महाराज ने आचार्य भक्ति अंतर्गत आचार्य शांति सागर महाराज की गृहस्थ अवस्था से दीक्षा,उपवास, उपसर्ग , व्रत परिसंख्यान,समाधि तक के अनेक प्रसंग बताएं।
वर्तमान में शेडवाल, कुंभोंज बाहुबली आदि स्थानों पर विद्यार्थियों के लिए गुरुकुल की स्थापना कराई।उनकी सुमधुर कंठ से आचार्य श्री का गुणानुवाद गीत सुनकर संपूर्ण सभा द्रवित हो गई अनेकों के नेत्र अश्रुओं से सजल हो गए। सम्मेदशिखर जी जो भाव सहित दर्शन वंदना करता हैं उसे तीर्यच और नरक गति नहीं मिलती है आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य भंवर लाल, राकेश कुमार, पवन कुमार, मनीष कुमार और चांदसेन वाले परिवार जयपुर को मिला शुक्रवार को निर्मोहीमति जी माताजी का केश लोचन हुआ पारसोला, किशनगढ़, पुणे से आए लोगों का सम्मान किया गया।
https://www.instagram.com/chanakya_news_india_rajasthan/
https://www.facebook.com/profile.php?id=61566375107356
टोंक से अशोक शर्मा की रिपोर्ट
