TONK // दशलक्षण पर्व पर हुआ पुष्पदंत भगवान का निर्वाण महोत्सव, सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां

टोंक में दशलक्षण महापर्व के अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के सानिध्य में धर्मसभा का आयोजन हुआ। आचार्य श्री ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि आगम अनुसार वचन ही सत्य हैं और सत्य आत्मा के हित में होता है। उन्होंने धर्म के 10 अंगों की विवेचना करते हुए बताया कि क्रोध को क्षमा से, मान को मार्दव से और माया को आर्जव धर्म से दूर किया जा सकता है।

आचार्य श्री ने कहा कि असत्य, कठोर और अप्रिय वचन आत्मा को मलिन करते हैं। वाणी का घाव कभी नहीं भरता, इसलिए हमेशा हितकारी और मधुर वचन बोलने चाहिए। जब सत्य बोलने में बाधा हो तो मौन रहना ही श्रेष्ठ है।

इसी क्रम में रविवार भादवा सुदी अष्टमी पर देवाधिदेव पुष्पदंत भगवान का निर्वाण महोत्सव मनाया गया। श्रद्धालुओं ने निर्वाण कांड का पाठ कर निर्वाण मोदक समर्पित किए। साथ ही पूजन में चढ़ाए जाने वाले द्रव्यों का महत्व भी आचार्य श्री ने प्रतिपादित किया।

दोपहर को तत्वार्थ सूत्र की विवेचना और रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। महिला मंडल द्वारा आचार्य वर्धमान सागर जी के तप, त्याग और धर्ममय जीवन पर आधारित नाटिका का मंचन किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को आत्मिक आनंद और गहन प्रेरणा दी।
इस अवसर पर अमित छामुनिया, दिनेश छामुनिया, सोनू पासरोटिया, पुनीत जागीरदार, प्रकाश सेठी, विकास अत्तार सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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टोंक से अशोक शर्मा की रिपोर्ट
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