TONK // इंद्रध्वज महामंडल विधान की शुरुआत, आचार्य वर्धमान सागर का प्रवचन

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TONK // दशलक्षण महापर्व के प्रथम दिवस पर आचार्य वर्धमान सागर ने क्षमा धर्म की महिमा बताई

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आचार्य वर्धमान सागर सानिध्य में विधानाचार्य पंडित कीर्तीय पारसोला के निर्देशन में अनेक धार्मिक कियाओ के साथ इंद्रध्वज मंडल विधान की पूजन प्रारंभ हुई आचार्य ने प्रवचन में बताया कि वर्ष में 365 दिन में आप 355 दिनों से इन 10 विशेष दिनों की प्रतीक्षा करते हैं, कब यह पर्व आएंगे और पर्व आ भी गए। जिस निमित्त आत्मा पवित्र हो उसे पर्व कहते हैं। दश लक्षण पर्व धर्म का सीजन है, इसके पहले 16 कारण पर्व में पूजन कर तीर्थंकर नाम कर्म प्रकृति का बंध किया जाता है।

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धर्म के 10 अंग उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य शोच ,संयम ,तप त्याग, आकिंचन तथा ब्रह्मचर्य होते हैं। 10 लक्षण महापर्व हमारी अध्यात्मिक उन्नति का पर्व है यह हमारी संस्कृति धर्म की धरोहर है। पर्व हमें धैर्य सिखाता है, यह मंगल देशना दशलक्षण महापर्व के प्रथम उत्तम क्षमा दिवस पर आचार्य वर्धमान सागर महाराज ने प्रकट की। राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य ने आगे बताया कि जिस प्रकार रावण के 10 मुंह होते हैं , उसी प्रकार हम भी आत्मा पर लगी 10 बुराइयों को इन 10 धर्म से दूर नष्ट कर सकते हैं। क्रोध, मान, माया लोभ , परिग्रह से हमारी आत्मा ग्रसित है। हर प्राणी सुख ,शांति, आनंद चाहता है धर्म के बीज बोने से सुख शांति और आनंद मिलता है।

जिस प्रकार बीमार व्यक्ति दवाई लेने से रोग मुक्त होता है उसी प्रकार हमारी आत्मा पर जो कर्म रूपी रोग हैं वह इन 10 धर्म के अंग रूपी रसायन दवाई से दूर होते हैं। पर्व हमें आत्मिक सुख देते हैं। जिस प्रकार दीपावली पर आप घर का कचरा अनावश्यक सामग्री दूर करते हैं , उसी प्रकार यह पर्व भी आध्यात्मिक दीपावली है इससे आप आत्मा पर जो विषय भोग कषाय आदि गंदगी मन की निर्मलता,से आत्म साधना कर सिद्धि प्राप्त कर सकते है। इंद्र ध्वज मंडल विधान में 458 अकृत्रिम जिनालयों , प्रत्येक जिनालयों में 108 जिनेंद्र प्रभु की प्रतिमाएं है जो 500 धनुष अर्थात 2000 फीट ऊंची होती है उन 49464 प्रतिमाओं की पूजन इस विधान में आप इन्द्र बनकर कर रहे हैं।

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संसारी प्राणी को चार कषायो को चार पुरुषार्थ और दश धर्म से आत्मा को पावन बनाने का पुरुषार्थ कर रहे है। आचार्य के प्रवचन के पूर्व आर्यिका महायश मति माताजी का उपदेश हुआ। जिन मंदिरों पर ध्वजारोहण करके जो विधान इंद्र बनकर किया जाता है उसे इंद्रध्वज मंडल विधान कहते हैं। इससे यश सभी दिशा में फैलता है। धर्म की परिभाषा में बताया कि जीवो की रक्षा, सम्यक दर्शन ,उत्तम क्षमा आदि 10 धर्म, वस्तु का स्वभाव , चरित्र आदि धर्म की परिभाषा है। उत्तम क्षमा धर्म की विवेचना में अनेक उदाहरण से बताया कि क्षमा धैर्य और सहनशीलता से आती है क्षमा स्थाई होती है क्रोध अस्थाई होता है क्रोध से सर्वनाश, विवेक , विनय शरीर क्षय, और मैत्री,पुण्य ओर धैर्य का नाश होता है।

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क्षमा के गुण में बताया कि क्षमा अजय शक्ति, परम तीर्थ ,अमृत ,परम रसायन ,मेघ ,ज्ञान भूषण और आत्मा का स्वभाव क्षमा है। समाज प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार अनुसार आज दसलक्षण के प्रथम दिवस आचार्य श्री के सानिध्य में प्रात काल की बेला में श्रीजी का पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। इसके पश्चात इंद्रध्वज मंडल विधान के मंडप का उद्घाटन श्रेष्ठी बाबूलाल, पदमचंद, पवन कुमार, अनिल कुमार कंटान परिवार द्वारा किया गया।

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तत्पश्चात इंद्र बनने का सौभाग्य कुबेर इंद्र श्रेष्ठी नरेंद्र कुमार, ओम प्रकाश, पंकज कुमार ककोड़, सोधर्म इंद्र श्रेष्ठी दिनेश कुमार, अमित, बीना छामुनिया, ईशान इंद्र श्रेष्ठी सौरभ कुमार, जंबू कुमार, टोनी कुमार आंडरा परिवार, सनत कुमार इंद्र श्रेष्ठी मोहन लाल, पुष्पा देवी छामुनिया, महेंद्र कुमार इंद्र श्रेष्ठी नेमीचंद, जितेंद्र कुमार बनेठा, ब्रहमेंद्र इंद्र श्रेष्ठी मदन लाल, मिट्ठू लाल, महावीर प्रसाद दाखिया, ब्रहमोतर इंद्र श्रेष्ठी विमलचंद, कमल कुमार, रमेश कुमार,मुकेश कुमार बरवास, लांतव इंद्र श्रेष्ठी विमल चंद, रमेश कुमार, विवेक कुमार काला, कापिष्ट इंद्र श्रेष्ठी वीरेंद्र कुमार, अंकुर कुमार पाटनी, शुक्र इंद्र श्रेष्ठी पारसचंद, अनिल, सुनील, कमल सर्राफ, महाशुक्र इंद्र श्रेष्ठी पारसचंद, सुरेंद्र कुमार, नरेंद्र कुमार, अंशुल कुमार छामुनिया, शतार इंद्र श्रेष्ठी पवन कुमार, सुनील कुमार, निरंजन कुमार, विकास कुमार अत्तार, शेषाद्रइंद्र श्रेष्ठी पारसचंद, अनिल, सुनील, कमल सर्राफ, प्राणत इंद्र श्रेष्ठी कमल कुमार, पुनीत कुमार, सुमित कुमार, अक्षत जागीरदार, आरण इंद्र श्रेष्ठी धर्मचंद अभिषेक कुमार आंडरा, अच्युत इंद्र श्रेष्ठी महावीर प्रसाद, धर्मचंद, जितेंद्र, अविकांश पासरोटिया, यज्ञ नायक श्रेष्ठी मदन लाल, मिट्ठू लाल, महावीर प्रसाद, सत्यप्रकाश दाखिया, दस दिवसीय अखंड ज्योति का सौभाग्य लालचंद, आशीष कुमार फूलेता परिवार को मिला।

टोंक से अशोक शर्मा की रिपोर्ट

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