BIKANER // नगर पालिका बनने के 12 माह बाद भी नापासर में पानी निकासी, गड्ढे और सफाई व्यवस्था जस की तस – बारिश ने खोल दी पोल

नापासर को सरकार के पहले ही बजट में नगर पालिका का दर्जा मिल गया था। भले ही डी-ग्रेड पालिका बनी हो, लेकिन आखिरकार बनी तो नगर पालिका ही है, मगर हकीकत यह है कि नगर पालिका बनने के बाद भी हालात ग्राम पंचायत से बदतर नज़र आ रहे हैं।

लगभग 12 महीने का समय बीत चुका है, लेकिन कस्बे की पानी निकासी, सड़कों पर गहरे गड्ढे, कीचड़, सफाई व्यवस्था और शिविर लाइन जैसी समस्याएँ जस की तस बनी हुई हैं। बीते शुक्रवार की आधे घंटे की तेज बारिश ने तो नगर पालिका प्रशासन की पूरी पोल खोल दी। मुख्य बाजार की सड़क, गीता देवी बागड़ी बालिका विद्यालय,भेरुनाथ मंदिर और चुंगी मार्ग तक गहरे गड्ढों में पानी भर गया।
शनिवार दोपहर को हालात ऐसे बने कि एक टैक्सी चालक हादसे का शिकार होते-होते बच गया।ग्रामीणों का कहना है कि “नगर पालिका बनने से बेहतर तो ग्राम पंचायत ही थी, जहां छोटी-बड़ी समस्याओं का निस्तारण सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी करवा देते थे। अब तो समझ ही नहीं आता कि किससे कहें और कौन सुने।”
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हालांकि नापासर नगर पालिका का कार्यालय शुरू हो चुका है, अधिशासी अधिकारी समेत कुछ कार्मिक बैठते भी हैं, और सफाई व्यवस्था ठेके पर दी गई है। बावजूद इसके बारिश के मौसम में बार-बार हादसे और जलभराव प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
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बीकानेर से शिव शर्मा की रिपोर्ट
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