BARAN // बदबू और बीमारियों से त्रस्त लोग, जलझूलनी एकादशी का आयोजन खतरे में

कवाई कस्बे का ऐतिहासिक बड़ा तालाब, जो कभी यहां की शान था, आज गंदगी और बदबू का केंद्र बन चुका है। तालाब में फैली भयानक गंदगी और उसके चारों ओर जमा कूड़े-कचरे से उठने वाली दुर्गंध ने आस-पड़ोस के लोगों का जीना दूभर कर दिया है। यह स्थिति न केवल असहनीय है, बल्कि इसने इलाके को बीमारियों का अड्डा भी बना दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि तालाब की दुर्दशा के कारण घरों में रहना मुश्किल हो गया है। बदबू इतनी तेज है कि नरसिंह चौक से निकलने वाले लोगों को अपनी नाक और मुंह ढक कर निकलना पड़ता है।

बदबू और प्रदूषण के कारण मलेरिया, टाइफाइड, और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, और कई परिवार पहले ही इसकी चपेट में आ चुके हैं। आश्चर्य की बात यह है कि इस समस्या की जानकारी ग्राम पंचायत को कई बार दी जा चुकी है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यह मामला तब और गंभीर हो जाता है, जब आगामी जलझूलनी एकादशी के पर्व को देखा जाए। इस दिन कस्बे के सभी मंदिरों के देवी-देवताओं को पालकी में बैठाकर इसी तालाब में नौका विहार कराया जाता है।
तालाब की वर्तमान स्थिति से धार्मिक भावनाओं को गहरा आघात पहुंचा है। लोगों का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी और उदासीनता के कारण एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन भी खतरे में है। ग्राम पंचायत और प्रशासन की लापरवाही से परेशान होकर, अब स्थानीय लोगों ने अपनी आवाज बुलंद की है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल तालाब की सफाई कराने और इसे फिर से अपने पुराने गौरव को वापस दिलाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों को इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेना चाहिए, वरना यह बदहाली और भी बड़े संकट को जन्म दे सकती है।
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बारां से राजेश कुमार की रिपोर्ट
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