BARAN // तालाब में फंसी गौमाता को गौरक्षकों ने बचाया

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BARAN // गौमाता की जान बचाने तालाब में कूदे गौरक्षक, 6 साल से कर रहे निस्वार्थ सेवा

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कवाई कस्बे में गुरुवार को सुबह करीबन 10:30 एक गौमाता छोटे तालाब में फंस गई थी, लेकिन हालात जैसे ही गंभीर हुए, हिंदू धार्मिक सेवा समिति के गौरक्षक तुरंत हरकत में आए। अपनी जान की परवाह किए बिना तालाब में कूदकर गौमाता को सुरक्षित बाहर निकाला और इंसानियत व सेवा की मिसाल पेश की। समिति सदस्य विष्णु चक्रधारी भाया, अमित जोशी, दीक्षांत मंडिया, नरेंद्र सुमन ने बताया कि हिंदू धार्मिक सेवा समिति के द्वारा पिछले 6 वर्ष से लगातार निस्वार्थ भाव से गौसेवा कार्य किया जा रहा है जो कस्बे में ही नहीं कस्बे के आसपास क्षेत्र के गांवों में करीबन 10 से 15 किलोमीटर दूर जाकर। सैकड़ो रेस्क्यू कर चुके हैं।

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इस घटना में उन्होंने फिर एक बार साबित किया कि जब बात गौसेवा की हो, तो पीछे नहीं हटेंगे। घटना की जानकारी सबसे पहले स्थानीय निवासी भूपेंद्र को हुई, जिन्होंने गौमाता को तालाब के बीच फंसा देखा और तुरंत समिति को सूचना दी। सूचना मिलते ही विष्णु चक्रधारी भाया, अमित जोशी, दीक्षांत मंडिया, नरेंद्र सुमन मौके पर पहुंचे और देखा कि गौमाता बुरी तरह फंसी हुई है हालात गंभीर थे, ऐसे में समिति ने अपने ही दो तैराक और अनुभवी गौरक्षक गिर्राज महावर और करण महावर को बुलाया। दोनों बिना देर किए तालाब में कूद गए और करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद गौमाता को किनारे तक लाए।

फिर अन्य साथियों की मदद से उसे बाहर निकाला गया। गौमाता को प्राथमिक उपचार देने के बाद सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया, जहां समिति उसकी देखरेख कर रही है। जब नीयत सेवा की हो तो गंदगी भी पवित्र हो जाती है ,,,यही भावना इस कार्य में नजर आई, जिस तालाब में लोग छू जाने भर से स्नान किए बिना पूजा-पाठ नहीं करते, उसी गंदगी से भरे तालाब में कूदकर हिंदू धार्मिक सेवा समिति के गौरक्षकों ने गौमाता की जान बचाई। यह साहसिक कार्य केवल एक रेस्क्यू नहीं, बल्कि निस्वार्थ सेवा, समर्पण और मानवीयता की मिसाल बन गया।

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बारां से राजेश की रिपोर्ट

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