ALWAR // ईद-उल-अजहा पर अलवर ईदगाह में अकीदतमंदी का नज़ारा, टीकाराम जूली ने दी शुभकामनाएं

अलवर शहर के नया बास स्थित ईदगाह में आज मुस्लिम समाज ने बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ नमाज़-ए-ईद अदा की।

ईद-उल-अजहा यानी बकरा ईद को हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की अल्लाह के प्रति वफादारी और कुर्बानी की भावना के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है मस्जिद के मौलवी साहब ने बताया कि पैग़म्बर हज़रत इब्राहीम (अ.स.) को अल्लाह ने सपना दिखाया कि वे अपने सबसे प्यारे बेटे इस्माईल (अ.स.) की कुर्बानी दें।

हज़रत इब्राहीम ने अल्लाह की आज़माइश को बिना हिचक स्वीकार किया। लेकिन जैसे ही उन्होंने बेटे की कुर्बानी देने का प्रयास किया, अल्लाह ने करुणा दिखाते हुए एक दुम्बे को भेज दिया — और कुर्बानी का सिलसिला उसी क्षण से एक प्रतीक बन गया ईदगाह में विशेष नमाज़ के बाद लोगों ने बकरे और दुम्बे की कुर्बानी दी।
इसका मांस तीन हिस्सों में बांटा जाता है — एक हिस्सा गरीबों को, दूसरा रिश्तेदारों को और तीसरा स्वयं के लिए इस अवसर पर राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी ईदगाह पहुंचकर मुस्लिम समाज को गले मिलकर ईद की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने देश और प्रदेश में अमन, भाईचारे और आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
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अलवर से शक्ति सिंह प्रजापति की रिपोर्ट
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