TONK // देशभर से आए गुरुभक्तों ने आचार्य वर्धमान सागर का 76वां अवतरण वर्ष भक्ति पूर्वक मनाया।

TONK – टोंक में मन, वचन, काय की कुटिलता का परित्याग कर चित्त में सरल निष्कपट भाव धारण करना ही उत्तम आर्जव धर्म है। देशभर से आए गुरुभक्तों ने आचार्य वर्धमान सागर का 76वां अवतरण वर्ष भक्ति पूर्वक मनाया। दशलक्षण पर्व के तृतीय उत्तम आर्जव दिवस पर आचार्य ने अपने देशना में बताया कि भगवान की इंद्रध्वज मंडल विधान की पूजा सामान्य बात नहीं है। बहुत पुण्यशाली को ही इसका अवसर मिलता है। आर्जव धर्म, अर्थात सरलता, हमें ऋजुता (सिद्धता) की ओर ले जाता है। सरलता जिसके जीवन में होती है, वह मोक्ष मार्ग के निकट होता है।

TONK – सर्प के उदाहरण से उन्होंने बताया कि सर्प बिल के बाहर आड़ा तिरछा चलता है, किंतु जब वह बिल में जाता है तो सीधा हो जाता है। इसी प्रकार, आपका असली घर मोक्ष है, इस कारण जीवन में सरलता लाना आवश्यक है। राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य ने आगे बताया कि सरल शब्दों में मायाचारी का अभाव ही सरलता होता है। मन, वचन, काय की कुटिलता का परित्याग कर चित्त में सरलता और निष्कपट भाव धारण करना ही उत्तम आर्जव धर्म है। धर्म कुटिलता में नहीं बल्कि सरलता में होता है। चार कषायों में मायाचारी, नर्क और त्रियंच गति का द्वार है।
मायाचारी दुर्भाग्य की जननी है। जीवन में अपयश अच्छा नहीं होता। व्यसन और खानपान की विकृति से जीवन का नाश होता है। श्रावकों और श्राविकाओं के 6 आवश्यक कार्य जिनवाणी में उल्लेखित हैं। आज के 76वें अवतरण वर्ष पर अनेक पुरुष और महिलाओं ने अपनी शक्ति अनुसार व्रत नियम लिए। मुनि हितेंद्र सागर ने गुणानुवाद में बताया कि दशलक्षण पर्व में भादो शुक्ल सप्तमी, 18 सितंबर, सन 1950 को आचार्य का जन्म हुआ। बालक यशवंत ने 19 वर्ष की उम्र में आचार्य धर्म सागर से सन 1969 में मुनि दीक्षा प्राप्त की। नव दीक्षित मुनि के जीवन में उपसर्ग और अंतराय की बहुलता रही। जयपुर और अन्य नगरों में भी उपसर्ग हुए।
जयपुर में भगवान समक्ष 3 घंटे शांति भक्ति के पाठ से बिना डॉक्टरी इलाज के नेत्र ज्योति 52 घंटे बाद आ गई। सन 1990 में आचार्य बनने के बाद बाहुबली भगवान के 3 महा मस्तकाभिषेक और महावीर का महा मस्तकाभिषेक आपके प्रमुख सानिध्य में हुआ। आचार्य पद के बाद अभी तक आपने 117 दीक्षाएँ दी। आपके 76वें जन्म अवतरण दिवस को मनाने के लिए देश-विदेश से भक्त आए। प्रातःकाल भक्तों ने भजन और नृत्य से भक्ति की। समस्त संघ के साधुओं ने परिक्रमा लगाकर आचार्य भक्ति की।
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टोंक से अशोक शर्मा की रिपोर्ट
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