BARAN // अटरू क्षेत्र के कवाई-सालपुरा में सफाई व्यवस्था ध्वस्त, पंचायत पर लापरवाही के आरोप

बारां जिले के अटरू क्षेत्र की ग्राम पंचायत कवाई-सालपुरा, में हर साल सफाई के नाम पर ₹50 लाख खर्च किए जाते हैं। लेकिन ये पैसे कहां जाते हैं, यह एक बड़ा सवाल है, क्योंकि हकीकत में कस्बा नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर है। पंचायत मुख्यालय से महज 100 मीटर दूर, बड़े तालाब के पास गंदगी और कचरे का अंबार लगा है, जिससे स्थानीय लोग बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।

सफाई के नाम पर लाखों का बजट खर्च होने के बावजूद, कस्बे की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। खाली भूखंडों में गंदे पानी और कचरे के ढेर लगे हैं। न तो कस्बे की सही तरह से सफाई हो रही है और न ही गंदे पानी का निस्तारण। लोगों का मानना है कि पंचायत सिर्फ कागजों पर ही ‘स्वच्छता’ दिखा रही है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

इसी तालाब के पास जलझूलनी एकादशी पर विशाल मेला लगता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। कस्बे के देव विमान भी इसी रास्ते से निकलते हैं और तालाब में नौका विहार कराया जाता है। लेकिन गंदगी और बदबू के कारण श्रद्धालुओं को नाक-मुंह ढककर गुजरना पड़ता है, जो आस्था के साथ बड़ा अपमान है।
स्थानीय लोगों ने कई बार ग्राम पंचायत और प्रशासन को इस स्थिति के बारे में बताया है, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हुई। लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है, और वे पूछ रहे हैं कि क्या प्रशासन किसी बड़ी महामारी का इंतजार कर रहा है? अगर जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है।
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बारां से राजेश मंगल की रिपोर्ट
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